आज भी सत्ता की चाह रखने वाले चल रहे हैं, “अबाध शासन करना है तो बुद्धिजीवियों और राष्ट्रभक्तों का समूल उन्मूलन करना ही होगा.

गुलामी के दिन थे। प्रयाग में कुम्भ मेला चल रहा था। एक अंग्रेज़ अपने द्विभाषिये के साथ वहाँ आया। गंगा के किनारे एकत्रित अपार जन समूह को देख अंग्रेज़ चकरा…

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सदैव याद रखें कि संसार में जो हो रहा है,वह सब ईश्वरीय विधान है! हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं!

मैं न होता तो क्या होता “अशोक वाटिका" में जिस समय रावण क्रोध में तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ातब हनुमान जी को लगा कि इसकी…

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