जय श्री सीताराम आज अचला सप्तमी का पर्व है इसका नाम लोगों ने रख दिया है अचला जबकि यह अचल सप्तमी है आज का किया हुआ सब कुछ अचल हो जाता है कभी मिटता ही नहीं है चाहे वह पाप हो चाहे पुण्य हो पाप करेंगे तो इस पाप का निवारण किसी भी देवी देवता के पास नहीं है पूर्ण करेंगे 30 पुण्य का फल सात जन्म तक मिलता ही रहेगा चाहे दान हो चाहे जब हो हवन हो आज के दिन भगवान ब्रह्मा के यज्ञ की पूर्णाहुति हुई है प्रयाग में सृष्टि के पहले भगवान ब्रह्मा ने जो यज्ञ किया था सर्वप्रथम मृत्युलोक में यज्ञ की पूर्णाहुति हुई आज ही यज्ञ स्वरूप भगवान प्रकट होकर भगवान ब्रह्मा को अपना साकेत पुरी भेंट किया और उनको आदेश दिया आप सृष्टि की रचना करें भगवान ब्रह्मा वटवृक्ष यमुना के किनारे निवास कर रहे थे उसी वटवृक्ष के नीचे यज्ञ स्वरूप भगवान का दर्शन हुआ सृष्टि की रचना का कार्य वहीं से आज से ही प्रारंभ हुआ इसलिए अचला सप्तमी का पर्व माघ में सबसे विशेष माना जाता है यह वह पर्व नहीं है कि केवल अचला उड़ाने से ही इसका तात्पर्य है बल्कि आज का किया हुआ सब कुछ चल हो जाता है जो चलाएं मान नहीं होता है इसका फल अनंत होता है भगवान राम की कृपा अचला सप्तमी को विशेष तौर पर अपने भक्तों के ऊपर होती है साकेत धाम बिनैका बाबा मानव कल्याण ट्रस्ट अचला सप्तमी की ढेर सारी शुभकामना आप सभी लोगों को भक्तों को देता है साकेत धाम परिवार अचला सप्तमी का पर्व मनाते हुए अपने-अपने गौरवान्वित महसूस कर रहा है

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