महाराज अग्रसेन का इतिहास, पूर्वज और वंशावली

जय श्री सीताराम महाराज,

अग्रसेन जी के जीवन का विशेष परिचय कुछ लोगों ने प्रश्न किया कि महाराज जी क्या महाराज अग्रसेन राम बंसी हैं, उसी विषय में एक छोटा सा लेख प्रस्तुत किया जा रहा है अच्छा लगे तो आप लोग इसको शेयर करें। द्वापर के अंत में कलियुग के प्रारंभ में महाराजा इक्ष्वाकु के वंशज एक राजा हुए जो खांडवप्रस्थ के महाराजा थे, जिनका नाम बल्लभ सेन है। उन्हीं बल्लभ सेन के पुत्र का नाम अग्रसेन जी है, जिन्होंने देश को विकसित करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। आर्थिक जगत को उदारीकरण करने में बहुत बड़ा योगदान है, इनके जन्म भूमि के विषय में कई मत हैं पर विशेष तौर पर यह हरियाणा में अमरोहा नामक स्थल पर इनका जन्म हुआ है।

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कुछ लोगों का मत है कि आगरा इनकी जन्मभूमि है, इसीलिए आगरा नाम पड़ा कार्तिक महीने में अमरोहा धाम में विशेष उत्सव मनाया जाता है। बल्लभ सेन जी के माता जी का नाम महालक्ष्मी देवी है और अग्रसेन जी के माता जी का नाम भगवती देवी है। अग्रसेन महाराज के पिताजी का नाम बल्लभ सेन है। यह तो प्रमाणित है कि महाराज अग्रसेन इक्ष्वाकु वंशीय हैं राम वंशीय महाराज अग्रसेन जी बहुत बड़े प्रतापी महाराजा थे, उनके समय में प्रजा को कभी भी कष्ट नहीं होता था। आज भी उनके वंश में अग्रवाल बंधुओं के द्वारा जनहित कार्य बहुत बड़े स्तर में किया जाता है अग्रवाल बंधुओं को सादर समर्पित करता हूं।

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महाराजा अग्रसेन क्षत्रिय धर्म को त्यागने का कारण यह बताया गया है कि उस उबली हुआ करता था नरबलि हुआ करता था इन कारणों को लेकर हिंसा के प्रति जनता को दूर करने के लिए अपने आपको उन्होंने वैश्य धर्म को स्वीकार कर दिया।

बल्लभ सिंह जी के पुत्र थे इनका विवाह नागराज की कन्या से हुआ था नागराज की बेटी माधवी से हुआ था जिनसेइसी कारण अग्रवाल समाज में नाग की पूजा विशेष तौर पर मानी जाती है अग्रवाल समाज में नाग को अपनाना ना समझते हैं ल

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