अपने अतिथि , एक करोड़पति से पूछा ,आपने जीवन में सबसे अधिक खुशी का एहसास कब महसूस किया?

करोड़पति ने कहा – मैं जीवन में खुशियों के चार पड़ावों से गुजरा हूँ , और आखिरकार मैंने सच्ची खुशी को समझा!

पहला चरण धन और साधनों का संचय करना था.. लेकिन इस स्तर पर मुझे कोई खुशी नहीं मिली!

फिर मूल्यवान वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण लेकिन मुझे एहसास हुआ कि इसका प्रभाव भी अस्थायी है . और मूल्यवान चीजों की चमक लंबे समय तक नहीं रहती है!

फिर बड़े प्रोजेक्ट्स पाने का तीसरा चरण आया जैसे क्रिकेट टीम खरीदना , टूरिस्ट रिसोर्ट खरीदना आदि , लेकिन यहाँ भी मुझे वह खुशी नहीं मिली , जिसकी मैंने कल्पना की थी!

चौथी बार तब जब मेरे एक मित्र ने मुझे एक कहानी सुनाई की

*”कभी कहीं एक मालन को रोज़ राजा की सेज़ को फूलों से सजाने का काम दिया गया था। वो अपने काम में बहुत निपुण थी। एक दिन सेज़ सजाने के बाद उसके मन में आया की वो रोज़ तो फूलों की सेज़ सजाती है, पर उसने कभी खुद फूलों के सेज़ पर सोकर नहीं देखा था।”*

*कौतुहल-बस वो दो घड़ी फूल सजे उस सेज़ पर सो गयी। उसे दिव्य आनंद मिला। ना जाने कैसे उसे नींद आ गयी।*

*कुछ घंटों बाद राजा अपने शयन कक्ष में आये। मालन को अपनी सेज़ पर सोता देखकर राजा बहुत गुस्सा हुआ। उसने मालन को पकड़कर सौ कोड़े लगाने की सज़ा दी।*

*मालन बहुत रोई, विनती की, पर राजा ने एक ना सुनी। जब कोड़े लगाने लगे तो शुरू में मालन खूब चीखी चिल्लाई, पर बाद में जोर-जोर से हंसने लगी।*

*राजा ने कोड़े रोकने का हुक्म दिया और पूछा – “अरे तू पागल हो गयी है क्या? हंस किस बात पर रही है तू?”*

*मालन बोली – “राजन! मैं इस आश्चर्य में हंस रही हूँ कि जब दो घड़ी फूलों की सेज़ पर सोने की सज़ा सौ कोड़े हैं, तो पूरी ज़िन्दगी हर रात ऐसे बिस्तर पर सोने की सज़ा क्या होगी?”

*राजा को समझ आ गया कि जो कर्म हम इस लोक में करते हैं, उससे परलोक में हमारी सज़ा या पुरस्कार तय होते हैं।उसने तुंरन्त अपना शेष जीवन जन कल्याण में लगा दिया।*

कहानी सुनाकर मित्र ने कहा- दोस्त क्यों न ईश्वर की तुमपर हुई इस असीम कृपा को तुम भी जनकल्याण में लगाओ। विकलांगों के लिए व्हीलचेयर खरीदो, मैंने तुरंत उन्हें खरीदा लेकिन मेरे दोस्त ने जोर देकर कहा कि मैं उसके साथ चलूँ और विकलांग बच्चों को व्हीलचेयर सोंपू .

मैं तैयार हो गया, मैंने ये कुर्सियाँ अपने हाथों से जरूरतमंद बच्चों को दीं . मैंने चेहरों पर खुशी की अजीब चमक देखी! !!

मैंने उन सभी विकलांगों को कुर्सियों पर बैठे , घूमते और मस्ती करते देखा, ऐसा लगा जैसे वे किसी पिकनिक स्थल पर पहुंचे हों !!

जब मैं जगह छोड़ रहा था , तब बच्चों में से एक ने मेरे पैर पकड़ लिए . मैंने धीरे से अपने पैरों को मुक्त करने की कोशिश की , लेकिन बच्चा मेरे चेहरे को घूरता रहा! मैं नीचे झुका और बच्चे से पूछा – क्या आपको कुछ और चाहिए?

बच्चे के जवाब ने न केवल मुझे खुश किया बल्कि मेरी जिंदगी भी पूरी तरह से बदल दी ! !!

*बच्चे ने कहा “मैं आपके चेहरे को याद करना चाहता हूँ , ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूँ , तो मैं आपको पहचानने में सक्षम हो जाऊँगा और एक बार फिर से आपको धन्यवाद दूँगा”!*

*आज हम ऐसे मददगार बनें , और जरूरतमंदों के प्रति ऐसी सहानुभूति प्रकट करें , जो अमिट छाप छोड़ दे ! और वे लोग हमारे चेहरे को आजीवन विस्मृत न कर पाएं !! आइए हम भी धन नही पूण्य कमाने की ओर आगे बढ़े।*

सेवा कर्म करे हरदम,जीवन सफल बनायें,
सब मिलकर,अपने सामर्थ्य से,सेवासदन बनाये!!

*जय श्री राम*
*सदैव प्रसन्न रहिये*

*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*
*जिसका मन मस्त है*
*उसके पास समस्त है!!*

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