सदा खुश रहो प्रभु आप के ऊपर प्रेम भरी कृपा बरसाते रहे समय बड़ा अनमोल है इसमें चिंता छोड़ कर चिंतन करना चाहिए चिंता करने से चिता मिलती है और चिंतन करने से चिंतामणि।

आखिर इस संसार में रहना कितने दिन है किसी को सेकंड किसी को मिनट किसी को घंटा किसी को दिन किसी को हफ्ता किसी को महीना किसी को साल कोई 1 साल कोई 10 साल कोई 20 साल कोई 100 साल कोई उससे अधिक भी जी सकता है परंतु जाना सभी को है सब कुछ छोड़ कर जाना है।

हम कितना भी जोड़ कर कितना भी वैभव प्राप्त कर ले एक दिन तो वृद्धावस्था आएगी ही और वृद्धावस्था में कोई अपना नहीं होता केवल परमात्मा ही काम आता है इसलिए उस परमात्मा से ही प्रेम करना चाहिए जितना हम उस परमात्मा पर विश्वास करेंगे वह हमारे लिए हर सुविधा अखंड करेगा संसार के लोग सुविधा कब तक देते हैं जब तक हम उनके काम आ रहे हैं जिस दिन उनके काम के नहीं रहेंगे लोग मुंह घुमा लेंगे हमारे अंदर सैकड़ों कमियां निकालना प्रारंभ कर देंगे परंतु परमात्मा ऐसा नहीं करता परमात्मा तो सदैव ही चाहे सुख में छोड़ दे परंतु दुख में परमात्मा कभी साथ नहीं छोड़ता।

दुख में केवल परमात्मा ही तो काम आता है संसार में अगर कोई अपना है तो सच्चा हितैषी परमात्मा ही है इसलिए हर घड़ी परमात्मा का ही चिंतन करना चाहिए परमात्मा पर पूर्ण भरोसा होना चाहिए कि वह मेरे लिए जो कुछ भी कर रहा है अच्छा ही कर रहा है और अच्छा ही करेगा अच्छा ही किया है वास्तव में परमात्मा ही तो अच्छा करता है संसार के लोग तो स्वार्थ लाग करे सब प्रीती स्वार्थ बस प्रीत करते हैं संसार के लोग परंतु मेरा परमात्मा तो कल्याण करने के लिए प्रेरित करता है दुख में तो एक घड़ी भी अपने भक्तों से दूर नहीं रहता।

पांडू पर जब तक दुख नहीं था तो परमात्मा उनकी निकट नहीं आया परंतु जब जब पांडवों पर विपत्ति का पहाड़ टूटा तो मेरे प्रभु ने उस विपत्ति के पहाड़ को चकनाचूर कर दिया और हर मोड़ पर हर पग पर पांडू की रक्षा की इतने बड़े विशाल महाभारत में कितने राजा महाराजा सैनिक वीर चिता में समा गए परंतु परमात्मा पर भरोसा रखने वाली पांडव पांच पांडव युद्ध के उपरांत जीवित रहे क्यों क्योंकि उनके साथ में भगवान वासुदेव श्री कृष्ण थे।

इसलिए अपने मन को परमात्मा से जोड़ दो जिस प्रकार पांडवों की रक्षा की वह हमारी भी रक्षा करेगा उस पर विश्वास रखो जो हमारी कल्याण की वस्तु है वह सदैव हमारे पास रहेगी क्योंकि परमात्मा हमारी रक्षा कर रहे हैं और जो हमारे हित की वस्तु है परमात्मा उसको कभी हमसे दूर नहीं करेगा और जो हमें दुख देने वाली वस्तु है परमात्मा उसको हमसे दूर कर देगा क्यों कि परमात्मा हमसे बहुत प्यार करता है परमात्मा सदैव हमारा चिंतन करता है हमारी कल्याण की सोचता है हमारी सुख-सुविधाओं की सोचता है।

वही तो एक परमात्मा है जो हमारे लिए सोच रहा है बाकी संसार के लोग तो केवल अपने अपने लिए सोच रहे हैं इसलिए परमात्मा से सच्ची प्रीत होनी चाहिए सच्चा प्रेम होना चाहिए और पूर्ण विश्वास होना चाहिए विश्वास फलदायक होता है उस परमात्मा से प्रीत करो।

परमात्मा तीन कार्यों से प्रसन्न होता है वह कार्य है सेवा भजन दान जो इन तीनों कार्यों को करता है उसके जीवन में सदैव आनंद ही आनंद बरसता है इसलिए सदैव दीन दुखियों की अपने माता पिता की और द्वार पर आए अतिथि की साधु संतों की और अपने देश की सेवा करनी चाहिए हजारों काम छोड़कर भजन करना चाहिए और उसको भी छोड़ कर भगवान की सेवा करनी चाहिए।

दान सदैव ही कल्याण करता है इसलिए अपने जीवन में दान को नहीं छोड़ना चाहिए दान से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान कर देना चाहिए और कभी कभी कुछ शुभ अवसरों पर जैसे कि तीरथ में जाकर साधु संतों की सेवा में जाकर कुंभ आदि में भगवान की सेवा में अपना सब कुछ लुटा कर भी आनंद ही प्राप्त होता है उस सेवा से हजारों गुना बढ़ जाता है जीव का इसलिए सेवा भजन दान जीवन में सदैव करते रहना चाहिए।

जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम

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